बीजेपी का राहुल गांधी पर तीखा प्रहार: अमेरिकी सांसदों के उमर खालिद पत्र को “भारत-विरोधी लॉबी” से जोड़ा
नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए उन्हें “भारत-विरोधी लॉबी” का हिस्सा करार दिया है। यह हमला अमेरिकी सांसदों द्वारा दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद को रिहा करने की मांग वाले पत्र के बाद तेज हो गया है। बीजेपी नेताओं ने राहुल गांधी पर विदेशी ताकतों से सांठगांठ का आरोप लगाते हुए कहा कि यह भारत की आंतरिक सुरक्षा को खतरे में डालने की साजिश है।
घटना का पूरा विवरण
अमेरिकी संसद के कुछ सांसदों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पत्र लिखकर उमर खालिद की तत्काल रिहाई की मांग की, जिसमें उन्हें “राजनीतिक कैदी” बताया गया। उमर खालिद पर 2020 दिल्ली दंगों में भड़काऊ भाषण देने का आरोप है, जो देश की राजधानी में 50 से अधिक लोगों की मौत का कारण बने। बीजेपी प्रवक्ता ने कहा, “राहुल गांधी और उनकी पार्टी लगातार भारत विरोधी तत्वों का समर्थन कर रही है। यह पत्र उनके इशारे पर लिखा गया लगता है।” विपक्ष ने इसे खारिज करते हुए कहा कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मामला है।
बीजेपी का कड़ा रुख
बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने संसदीय बोर्ड बैठक में राहुल गांधी को “राष्ट्र-विरोधी” बताते हुए कहा कि कांग्रेस ने हमेशा अलगाववादियों का साथ दिया है। पार्टी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर लिखा, “राहुल-अमेरिकी लॉबी का गठजोड़ भारत को बदनाम करने पर तुला है। उमर खालिद जैसे आतंक समर्थकों को बचाने की साजिश बेनकाब हो गई।” केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी राहुल पर “पाकिस्तान समर्थक” होने का तंज कसा। पार्टी ने कांग्रेस से इस पर सफाई मांगी है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और प्रतिक्रियाएं
यह विवाद उस समय भड़का जब राहुल गांधी ने हाल ही में अमेरिका यात्रा के दौरान भारत सरकार की आलोचना की थी। बीजेपी ने इसे जोड़ते हुए कहा कि कांग्रेस विदेशी हस्तक्षेप को बढ़ावा दे रही है। कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनाते ने पलटवार किया, “बीजेपी लोकतंत्र को कुचल रही है, उमर खालिद निर्दोष हैं।” नागरिक समाज और मानवाधिकार संगठनों ने भी पत्र का समर्थन किया, लेकिन राष्ट्रवादी संगठनों ने इसे देशद्रोह बताया। इस मुद्दे ने संसद सत्र को गरमा दिया है।
व्यापक प्रभाव
यह घटना भारतीय राजनीति में राष्ट्रवाद बनाम मानवाधिकार बहस को तेज कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे 2024 चुनावों के बाद भी राजनीतिक ध्रुवीकरण बढ़ेगा। सरकार ने विदेश मंत्रालय के माध्यम से अमेरिकी सांसदों को पत्र का जवाब दिया है, जिसमें कानूनी प्रक्रिया का हवाला दिया गया। फिलहाल, उमर खालिद जेल में हैं और उनकी याचिका पर सुनवाई जारी है।
















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