इंदौर में पेयजल प्रदूषण से जुड़ी त्रासदी अब गंभीर मोड़ पर पहुँच गई है, जहाँ दूषित पानी पीने से मौतों का आंकड़ा 10 तक पहुँच गया है। प्रशासन ने जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई करते हुए एक अधिकारी को बर्खास्त, दो को निलंबित कर दिया है और पूरे मामले की जांच के लिए उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की गई है।
घटनाक्रम और मौतों का बढ़ता आंकड़ा
इंदौर के प्रभावित क्षेत्रों में कई दिनों से लोगों में उल्टी, दस्त, बुखार और पेट दर्द जैसी शिकायतें सामने आ रही थीं। स्थानीय स्वास्थ्य विभाग को लगातार बढ़ रहे मामलों के बाद संदेह हुआ कि पेयजल आपूर्ति में गंभीर स्तर पर प्रदूषण हुआ है।
जांच के दौरान यह सामने आया कि नगर निगम/जलप्रदाय विभाग की सप्लाई लाइन में गंदे पानी की मिलावट के कारण बड़ी संख्या में लोग बीमार हुए। अस्पतालों में भर्ती कई मरीजों की हालत बिगड़ने के बाद अब तक 10 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है।
प्रशासनिक कार्रवाई: बर्खास्तगी और निलंबन
घटना के सामने आने के बाद जिला प्रशासन और राज्य सरकार दोनों स्तर पर जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया शुरू की गई।
प्रारंभिक जांच में लापरवाही पाए जाने पर जलप्रदाय/नगर निगम से जुड़े एक जिम्मेदार अधिकारी को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। दो अन्य अधिकारियों/कर्मचारियों को भी ड्यूटी में गंभीर लापरवाही के आरोप में निलंबित किया गया है।
सरकार की ओर से साफ संकेत दिया गया है कि भविष्य में भी यदि किसी स्तर पर लापरवाही साबित होती है तो और कड़ी कार्रवाई, जिसमें निलंबन, चार्जशीट और आपराधिक मुकदमा शामिल हो सकता है, से भी पीछे नहीं हटा जाएगा।
जांच समिति का गठन और दायरा
मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने एक उच्च स्तरीय जांच समिति (प्रोब पैनल) गठित की है।
यह समिति निम्न बिंदुओं पर विस्तृत जांच करेगी:
- किस स्तर पर और किस अवधि के दौरान पेयजल स्रोत प्रदूषित रहा















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