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From Mediation Maze to Mountain Mandate: Tirupparankundram Verdict Poised to Quell Hilltop Holy War

मध्यस्थता से आदेश तक: तिरुप्परंकुंड्रम फैसले से पहाड़ी पर न्याय शायद अंततः स्थिर हो जाए

मदुरै, 7 जनवरी 2026 (क्राइम इंडिया न्यूज): तमिलनाडु के मदुरै स्थित तिरुप्परंकुंड्रम पहाड़ी पर लंबे समय से चला आ रहा धार्मिक विवाद अब कोर्ट के एक महत्वपूर्ण फैसले के बाद शांत होने की कगार पर है। मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने 6 जनवरी 2026 को एक एकल पीठ के आदेश को बरकरार रखा, जिसमें अरुलमिगु सुब्रमणिया स्वामी मंदिर के भक्तों को पहाड़ी के शिखर पर स्थित ‘दीपथून’ (दीप स्तंभ) पर कार्तिगई दीपम जलाने की अनुमति दी गई है। यह फैसला मध्यस्थता की असफल कोशिशों के बाद आया है, जो विवाद को सुलझाने में नाकाम रही।​​

विवाद की पृष्ठभूमि

तिरुप्परंकुंड्रम पहाड़ी, जो सुब्रमणिया स्वामी मंदिर और सिकंदर दरगाह दोनों के लिए पवित्र है, दशकों से हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच तनाव का केंद्र रही है। 1920 के सिविल सूट (ओएस नंबर 4), जो 1931 में प्रिवी काउंसिल द्वारा पुष्टि किया गया, ने पहाड़ी के स्वामित्व को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया: दरगाह और उसके आसपास का क्षेत्र मुस्लिम समुदाय का, जबकि शेष हिस्सा देवस्थानम का। फिर भी, कार्तिगई दीपम जलाने के अधिकार पर विवाद बढ़ता गया। 2025 में एकल जज जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन ने सीआईएसएफ सुरक्षा में दीपम जलाने की अनुमति दी, लेकिन राज्य पुलिस ने इसे रोका, जिससे विरोध प्रदर्शन हुए। मुस्लिम पक्ष ने वक्फ बोर्ड का दावा किया, जिसे कोर्ट ने ‘हैरान करने वाला’ बताते हुए खारिज कर दिया।

कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

जस्टिस जी. जयचंद्रन और जे.के.के. रामकृष्णन की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार की अपील खारिज करते हुए कहा कि कानून-व्यवस्था का डर ‘काल्पनिक भूत’ है और कोर्ट के आदेश का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दीपथून देवस्थानम की जमीन पर है और दीपम जलाना धार्मिक प्रथा है, न कि विशेषाधिकार। एएसआई की मौजूदगी में सीमित पहुंच के साथ रस्म की अनुमति दी गई, लेकिन जनता को प्रतिबंधित रखा गया। राज्य की मध्यस्थता प्रयासों को पक्षपाती बताते हुए कोर्ट ने न्यायिक हस्तक्षेप को जरूरी ठहराया।​

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और भविष्य

तमिलनाडु सरकार और एचआरएंडसीई विभाग ने फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने का ऐलान किया है। बीजेपी ने इसे ऐतिहासिक जीत बताते हुए डीएमके पर हमला बोला। यूनियन मंत्री पीयूष गोयल ने इसे धार्मिक सद्भाव की मिसाल कहा। कोर्ट ने 2026 के कार्तिगई महीने तक अमल की संभावना जताई, लेकिन अपील से देरी हो सकती है। यह फैसला न केवल तिरुप्परंकुंड्रम, बल्कि पूरे देश में धार्मिक स्थलों पर विवादों के समाधान की दिशा तय कर सकता है।

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