चीन ने पाकिस्तान-भारत तनाव में मध्यस्थता का दावा किया है, जहां विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि बीजिंग ने मई में हुए संघर्ष को सुलझाने में भूमिका निभाई। भारत ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भी इसी तरह का दावा किया था।
वांग यी का बयान
चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने मंगलवार को बीजिंग में ‘अंतरराष्ट्रीय स्थिति और चीन की विदेश नीति पर संगोष्ठी’ में कहा कि चीन ने इस साल कई हॉटस्पॉट मुद्दों में मध्यस्थता की, जिसमें भारत-पाकिस्तान तनाव भी शामिल है। उन्होंने उत्तरी म्यांमार, ईरानी परमाणु मुद्दा, फिलिस्तीन-इजरायल विवाद और कंबोडिया-थाईलैंड संघर्ष के साथ इसे जोड़ा। वांग ने कहा, “हमने लक्षणों और जड़ कारणों दोनों को संबोधित करते हुए निष्पक्ष रुख अपनाया।”
मई 2025 संघर्ष का पृष्ठभूमि
यह दावा अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच 7-10 मई को हुए चार दिवसीय सैन्य संघर्ष के संदर्भ में आया है। भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाकर पाकिस्तान और PoK के आतंकी ठिकानों पर हमला किया, जिसमें पाकिस्तानी सैन्य स्थलों को भी निशाना बनाया गया। संघर्ष डीजीएमओ स्तर पर प्रत्यक्ष बातचीत से समाप्त हुआ।
भारत की प्रतिक्रिया
भारतीय अधिकारियों ने वांग के दावे को ‘अजीब’ बताया और स्पष्ट किया कि संघर्ष में चीन की कोई भूमिका नहीं थी। नई दिल्ली ने हमेशा द्विपक्षीय संवाद पर जोर दिया है, तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को नकारा है। ट्रंप के समान दावे पर भी भारत ने कड़ा रुख अपनाया था।
वैश्विक संदर्भ
चीन ने पाकिस्तान को हथियार दिए थे, जो संघर्ष में इस्तेमाल हुए, फिर भी मध्यस्थता का श्रेय लेने की कोशिश की। यह दावा भारत-चीन संबंधों में बॉर्डर विवाद और SCO जैसे मंचों पर पाकिस्तान समर्थन के बीच आया है। वांग ने भारत-चीन संबंधों में सुधार का जिक्र किया, लेकिन तनाव बरकरार हैं।
















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